Friday, 16 June 2017

ओमप्रकाश वाल्मीकि कविता 'जूता'



'जूता'  कविता 



ओमप्रकाश वाल्मीकि एक ऐसा नाम है जो अपने रचनाकर्म से गहराई तक हमे प्रभावित करता है | इनका साहित्य चाहे वह कहानी हो या फिर कविता हो आदि सब में किसी भी प्रकार का दुराव-छिपाव दिखाई नही देता तो इस लिहाज से इनका साहित्य एक 'सत्य साहित्य' की श्रेणी में आता है | (जूता) यह कविता  एक साथ वर्तमान, अतीत और भविष्य की चेतना और संवेदना के सन्दर्भ में आज भी  प्रसांगिक है |  



मेरी आँखे सोचने का काम करती है तो इसलिए आप भी देखिये और सोचिये |

                                                                                                            - वसीम







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●भीष्म साहनी- मानवीय संवेदना के सशक्त साहित्यकार●

आज है 8 अगस्त यानी बहु आयामी व्यक्तित्व से सराबोर,ज़िंदादिल, खुशमिज़ाज़ बहुमुखी प्रतिभा से ओत-प्रोत तथा मानवीय पहलुओं से सरोकार रखने वाले ...